प्रस्तुतियाँ (2013)

छठवां वर्ष

पुरबी के बादशाह, महेन्दर मिसिर की याद में

सांस्कृतिक भड़ैंती, फूहड़पन के विरूद्ध

जनसंस्कृति के संवर्द्धन के लिए

‘लोक-रंग  2013’

नाट्य समारोह/लोकनृत्य/लोकगायकी/वैचारिक गोष्ठी एवं कविता पोस्टर प्रदर्शनी

रात्रिकालीन कार्यक्रम (15-16 अप्रैल, रात्रि 9.15 से)

क्षेत्रीय लोक कलाकारों की प्रस्तुतियां-कुटनी/पिसनी के गीत और पंवरिया नृत्य ।

छत्तीसगढ़ का कबीर गायन,

लखनऊ, सुरेश कुशवाहा और साथियों का भोजपुरी गायन,

अवधी लोक समूह, फैजाबाद द्वारा प्रस्तुत फरुवाही,

गाजीपुर का धोबियाऊ, बलिया का आल्हा और हुड़का नृत्य ।

‘संकल्प’ (बलिया) द्वारा लोकगीत/जनगीत की प्रस्तुतियां

‘प्रेरणा’ (पटना), ‘गुड़ी’ (रायपुर) और ‘सूत्रधार’ (आजमगढ़) की नाट्य प्रस्तुतियां ।

राजकुमार, गाजीपुर के भित्ति चित्र और पोस्टर ।

दिन का कार्यक्रम (16 अप्रैल को प्रातः 11 बजे से)

गोष्ठीः ‘लोक कलाओं का समय और स्वरूप’

मुख्य अतिथि-प्रख्यात कथाकार ज्ञानरंजन और अध्यक्षता-प्रमुख आलोचक प्रो0 मैनेजर पांडेय ।

15-16 अप्रैल, 2013

स्थान-जोगिया जनूबी पट्टी, फाजिलनगर, कुशीनगर

आमंत्रित नाट्य संस्थाएं

प्रेरणा, जनवादी सांस्कृतिक मोर्चा, पटना के संस्थापक हसन इमाम, वर्तमान में इस संस्था के सचिव हैं । इस संस्था का गठन 1986 में किया गया था । संस्था की मुख्य पहचान नुक्कड़ नाटकों द्वारा सामाजिक चेतना विकसित करने में रही है ।

नाटक- पोलटिस उर्फ मुक्तनाद     अवधि- 1 घंटा 20 मिनट ।

प्रस्तुत नाटक दलित विमर्श के केन्द्र में रचा गया है जो तमाम सामाजिक संबंधों को वर्तमान परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत करता है । इसके लेखक और निर्देशकः-हसन इमाम हैं जिन्होंने नुक्कड़ नाटकों के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य किया है । इनके द्वारा लिखित दो मंचीय नाटक-पोलटिस उर्फ मुक्तनाद  और आहुति, सामाजिक विषयों को आधार बना कर लिखे गये हैं । इनकी पुस्तक ‘दलित लोकगाथाओं में प्रतिरोध’ चर्चित रही है ।

गुड़़ी, रायपुर, कला और नाटक को समर्पित एक सामाजिक, सांस्कृतिक संस्था है। छत्तीसगढ़ी में गुड़ी का अर्थ है, गांव का वह केन्द्रीय स्थान जहां लोग एकत्र और संगठित हांे, गांव के विकास के बारे में लोकतान्त्रिक रचनात्मक नीतियां बनाते हैं । गुड़ी के सभी सदस्य, आस-पास के परिवेश की निष्ठापूर्वक सेवा के साथ, नाट्य गतिविधियों के माध्यम से सहज भावनाओं की अभिव्यक्ति करते हैं। यह संस्था छत्तीसगढ़ी लोककलाओं और तमाम नाट्य रूपों को आगे बढ़ाने में सक्रिय है और पड़ोसी राज्यों के साथ सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रमों को समर्थन देती है। रानी दाई, बाबा पाखण्डी, मधुशाला, समूह की प्रशंसनीय प्रस्तुतियां रही हैं जिन्हें भारत के विभिन्न नाट्य उत्सवों में मंचित किया गया। लोकरंग 2010 में इस संस्था ने ‘बाबा पाखण्डी’ का मंचन किया था ।

नाटक-उजबक राजा तीन डकैत (हैंस क्रिश्चियन एंडरसन की कथा-‘द एम्परर्स न्यू क्लाथ्स’ पर आधारित )  अवधि-1 घंटा । लेखक- अलख नंदन

प्रस्तुत नाटक बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा कुटीर धंधों पर किये जा रहे हमलों और समकालीन राज्य व्यवस्था से इनके नापाक गठजोड़ को व्यंग्यात्मक शैली में प्रस्तुत करता है ।

निर्देशकः-डा0 योगेन्द्र चैबे, इन्दिरा कला संगीत विश्वविद्यालय के नाटक विभाग में व्याख्याता और संस्थापक शिक्षकों में हैं। उन्होंने ‘डिजाइन’ में विशेषज्ञता के साथ राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय से स्नातक की उपाधि प्राप्त की । छत्तीसगढ़ की देवार जनजाति पर उनके काम के लिए उन्हें राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय की अध्येतावृत्ति प्राप्त हुई। डा. चैबे के पास नाटक और रंगमंच के क्षेत्र में देश-विदेश की तमाम मूर्धन्य हस्तियों के साथ काम करने का समृद्ध अनुभव है ।

सूत्रधार, आजमगढ़़ की सांस्कृतिक इकाई ने विगत कुछ वर्षों से जननाट्य संस्कृति को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है । इस संस्था के निर्देशक अभिषेक पंडित हैं । लोकरंग 2009 में इस संस्था ने सर्वेश्वर दयाल सक्सेना कृति-‘हवालात’ का मंचन किया था । इस बार यह संस्था रविन्द्र नाथ ठाकुर रचित ‘गूंगी’ नाटक प्रस्तुत करने जा रही है । नाटक में एक गूंगी लड़की की त्रासदी को समाज की त्रासदी के रूप में चित्रित कर, मानवीय अनुभूतियों को उभारने का प्रयास किया गया है ।

नाटक-‘गूंगी’  अवधिः- 50 मिनट ।

निर्देशकः-इस नाटक का निर्देशन ममता पंडित ने किया है जो केन्द्रीय संगीत नाटक अकादमी द्वारा प्रशिक्षित हैं ।

पहली रात

15 अप्रैल, 2013

 

रात्रि 9.15                              ‘लोकरंग 2013’ स्मारिका का लोकार्पण /कार्यक्रम का अनौपचारिक उद्घाटन कार्यक्रम के मुख्य अतिथि-ज्ञानरंजन (प्रख्यात कथाकार) और अध्यक्ष-प्रो0 मैनेजर पांडेय (प्रमुख आलोचक) द्वारा।

रात्रि  9.30 से  9.40                     कुटनी/पिसनी गीत। मतिरानी, फूलमती, लीलावती एवं अन्य ।

रात्रि  9.40 से 9.55                      जनगीत, प्रेरणा, पटना ।

रात्रि 10.00 से 10.30                     आल्हा गायन । दरजन चैहान और साथी, बलिया ।

रात्रि 10.30 से 10.50                     बलिया टीम की लोक गायकी। आशीष त्रिवेदी और साथी ।

रात्रि 10.55 से 11.25                     हुड़का नृत्य। मोहन और साथी, बलिया ।

रात्रि 11.30 से 12.00                     पारंपरिक भोजपुरी धोबियाऊ नृत्य, गाजीपुर । निर्देशक/मुख्य गायक-जीवन राम चैधरी, झांझ- रामजनम, पखावज-विजय, कसावर-लल्लन, दंडताल-ननदू, रणसिंहा-मूसान, घोड़ी नर्तक- अमिताभ, रामसेवक, नृत्य-राकेश, सोनू-1, अजय, नागेन्द्र, सोनू-2

रात्रि 12.05 से 12.30                     कबीर गायन (गुड़ी, रायपुर, छत्तीसगढ़ की टीम)।

रात्रि 12.30                             नाटकः पोलटिस उर्फ मुक्तनाद, निर्देशक- हसन इमाम । प्रेरणा, पटना की प्रस्तुति।

दूसरा दिन

16 अप्रैल, 2013

प्रातः 11 से अपराह्न 2 बजे तक वैचारिक गोष्ठी . विषय-‘लोक कलाओं का समय और स्वरूप’

 

सहभागिता

प्रो. दिनेश कुशवाह (हिन्दी विभागाध्यक्ष, रीवा विश्वविद्यालय), प्रो. वीरेन्द्र नारायण यादव, संकायाध्यक्ष, मानविकी/अध्यक्ष, छात्र कल्याण, जयप्रकाश विश्वविद्यालय, छपरा, डाॅ0 तैयब हुसैन (पटना), महेश कटारे (कहानीकार, ग्वालियर), मदनमोहन (कहानीकार, गोरखपुर), शिवमूर्ति , देवेन्द्र सिंह , मुन्ना  तिवारी  , हरिनारायण (संपादक-कथादेश, दिल्ली), अनिल राय (प्रोफेसर, हिन्दी विभाग, गोरखपुर विश्वविद्यालय), हसन इमाम (प्रेरणा, पटना), अनिल पतंग (संपादक-रंग अभियान, बेगुसराय), चरण सिंह पथिक (कहानीकार, राजस्थान), डाॅ. योगेन्द्र चैबे (गुड़ी),  मनोज सिंह (पत्रकार एवं सचिव, जसम उ.प्र.), शिव नारायण सिंह (बाल कथाकार/शिक्षक, देवरिया), अशोक चैधरी (पत्रकार) एवं सभी आमंत्रित रंगकर्मी और जनपद के साहित्यकार ।

दूसरी रात

16 अप्रैल, 2013

दो महत्वपूर्ण नाटकों का मंचन

रात्रि  9.15  से  9.35                      बलिया टीम की गायकी ।

रात्रि  9.40  से 10.05                         पंवरिया नृत्य। शमसुद्दीन, शबीर, हरीफ, मुमताज एवं अन्य। सिसवानहर, कुशीनगर ।

रात्रि 10.05  से 10.35                      भोजपुरी गायक, सुरेश कुशवाहा और साथी, लखनऊ की प्रस्तुति ।

रात्रि 10.40  से 11.10                      अवधी लोक समूह, फैजाबाद द्वारा फरुवाही, शीतला प्रसाद वर्मा और साथी ।

रात्रि 11.15  से 11.20                      स्मृति चिन्हों का वितरण /लोकरंग सांस्कृतिक समिति के सदस्यों का परिचय/ग्रुप फोटोग्राफी।

रात्रि 11.25  से 12.15                      नाटक-गूंगी, निर्देशक-अभिषेक पंडित । सूत्रधार, आजमगढ़ की प्रस्तुति।

रात्रि 12.20  से                           नाटक-उजबक राजा तीन डकैत, गुड़ी, निर्देशक-योगेन्द्र चैबे । गुड़ी, रायगढ़ की प्रस्तुति।

अंत में                                 समापन और धन्यवाद ज्ञापन।

 

सांस्कृतिक कार्यक्रम संचालन-प्रो0दिनेश कुशवाह, विभागाध्यक्ष, हिन्दी विभाग, रीवा विश्वविद्यालय, म0प्र0 ।

गोष्ठी संचालन-के0के0पांडेय, जन संस्कृति मंच, लखनऊ

आयोजक

लोकरंग सांस्कृतिक समिति                                                         संपर्कः-      9984690938

 

 

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