आगामी कार्यक्रम

लोकरंग 2018,   अप्रैल 13-14,   2018

ग्यारहवां  वर्ष :

लोकरंग को आर्थिक मदद की जरूरत है . कृपया वेबसाइट के माघ्यम से  सहयोग करें .

लोकरंग 2018  के लिए देश से सुदूर देश भेज दिए  गये गिरमिटिया मजदूरों के  वंशजों को  शामिल होने के लिए नेवता भेजा गया है .  अभी स्वीकृति नहीं मिली है. अगर  मारीशस, त्रिनिदाद से सकारात्मक  सहयोग मिला तो नीदरलैंड से राजमोहन भाई भी आ सकते हैं . ऐसे  में 2018 का आयोजन ‘गिरमिटिया  मजदूरों की याद  में ‘  मनाया जायेगा . लोकरंग 2018 पत्रिका में तत्कालीन विस्थापन पर प्रचुर सामग्री प्रकशित की जाएगी .

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लोकरंग 2017  का विवरण

यह आयोजन महान साहित्यकार राहुल सांकृत्यायन और दलित चेतना के कवि हीरा डोम को समर्पित रहा.

11-12 अप्रैल 2017

मुख्य आकर्षण

बिरजिया (आदिम) आदिवासी समुदाय, लातेहार, झारखंड का बिरजिया, करम, सरगुल और महादेव नृत्य
चंदनलाल कालबेलिया लोकनृत्य समूह, जयपुर द्वारा राजस्थानी लोकगीत, घूमर, भवाई, अग्नि, कालबेलिया और चारी नृत्य
दीपांकर दास बाउल, चूचड़ा, पश्चिमी बंगाल का बाउल गान
राज मोहन म्यूजिकल ग्रुप, नीदरलैंड द्वारा प्रवासी भोजपुरी लोकगीत
चंदन तिवारी, आरा और साथियों का पुरबिया तान।
फैजाबाद अवधी लोक समूह का फरुवाही
गाजीपुर का पारंपरिक, भोजपुरी धोबिया लोक नृत्य
हिरावल, पटना का गायन
स्थानीय टीमों द्वारा-सोहर, जारी और उलटबांसियां
परिवर्तन समूह, ग्वालियर और रंगनायक द लेफ्ट थिएटर, बेगूसराय की नाट्य प्रस्तुतियां
संभावना कला मंच, गाजीपुर द्वारा भित्ति चित्र और कविता पोस्टर

महान साहित्यकार राहुल सांकृत्यायन (9 अप्रैल 1893 से 1963)- हिन्दी यात्रा साहित्य के जनक, राहुल सांकृत्यायन जैसा विद्वान, घुमक्कड़ व ‘महापंडित’ की उपाधि से स्मरण किया जाने वाला कोई अन्य साहित्यकार नहीं है। आजमगढ़, कनैला के निवासी राहुल सांकृत्यायन का वास्तविक नाम केदारनाथ पाण्डेय था। कुछ वर्षों तक वह रामोदर स्वामी के नाम से भी जाने जाते रहे । उनका ननिहाल में जन्म हुआ और बचपन वहीं बीता। पंदहा से कोई डेढ़ किलोमीटर दूर, रानी की सराय, मदरसे में शिक्षा शुरू हुई। नाना फौज में कर्नल के अर्दली थे । इसलिए शिकार के अलावा तमाम शहरों की यात्राओं की कहानियां, नाना सेे सुन, किशोर मन में दुनिया देखने की लालसा अंकुरित हुई। वह स्वदेश ही नही, विदेशों में जैसे नेपाल, तिब्बत, लंका, रूस, इंग्लंैड, यूरोप, जापान, कोरिया, मंचूरिया, ईरान और चीन में कितना घूमे, इसका पूर्ण उल्लेख नहीं मिलता।

हीरा डोम के बारे में हमें बहुत कम जानकारी प्राप्त है। वह बिहार के रहने वाले थे और उनकी एक मात्र कविता सरस्वती, सितम्बर, 2014 में छपी थी। कविता इतनी मार्मिक थी कि हीरा डोम को भुला पाना असंभव हो गया। पूरी कविता ‘लोकरंग-2’ में प्रकाशित की गई थी। कविता की कुछ पंक्तियां हैं-‘हमनी के रात दिन दुखवा भोगत बानी/हमनी के सहेबे से मिनती कराइबी/हमनी के दुख भगवनवो न देखत जे/हमनी के कबले कलेसवा उठाइबी’।

 

रात्रि 8.30 बजे ‘लोकरंग-3’ पुस्तक का लोकार्पण /कार्यक्रम का अनौपचारिक उद्घाटन ।
रात्रि 9.00 (10 मिनट)    जोगिया गांव की महिलाओं द्वारा कजरी गीत । गायिका-हीरमती, फूलमती, सीरमती, शांति,
गुजरी, उमरावती, आदि ।
रात्रि 9.10 (30 मिनट)     हिरावल, पटना का गायन । निर्देशन-संतोष झा ।
रात्रि 9.40 (20 मिनट)     केसरिया बालम पधारो म्हारो देश/म्हारो बादिलो चितारे बेरण आवेे हिचकी।
/नींबूड़ा नींबूड़ा गीत और चारी तथा घूमर लोकनृत्य की प्रस्तुतिः चंदनलाल कालबेलिया
लोकनृत्य समूह, जयपुर, राजस्थान की प्रस्तुति।
रात्रि 10.00 (30 मिनट)  राज मोहन म्युजिकल ग्रुप, नीदरलैंड द्वारा प्रवासी भोजपुरी ‘बैठकगाना’ की प्रस्तुतियां। संगत-
सोरद्ज (सूरज) सेवलाल (ढोलक) और पवन माहरे (धनताल)।
रात्रि 10.30 (15 मिनट)  दमादम मस्त कलंदर लोक गीत और भवाई नृत्य । प्रस्तुतिः चंदनलाल कालबेलिया
लोकनृत्य समूह, जयपुर, राजस्थान ।
रात्रि 10.45 (110 मिनट) नाटक-‘बाबूजी, परिवर्तन समूह, ग्वालियर की प्रस्तुति ।
रात्रि 12.35 (30 मिनट)   झारखंड का बिरजिया, करम, सरगुल और महादेव नृत्य।
रात्रि 1.05 (20 मिनट)     राजस्थानी अग्नि और कालबेलिया नृत्य, गोबरबंद लोकगीत ।
रात्रि 1.25 (15 मिनट)      निर्गुण गायकी की उलटबांसियां । रामजी सिंह एवं अन्य, ग्रा. सोहंग, कुशीनगर।

बुधवार: 12 अप्रैल, पूर्वाह्न 11 से अपराह्न 2 बजे तक विचार गोष्ठी

विषय-हाशिए का समाज और लोक संस्कृति ।

सहभागिता-प्रो. चैथी राम यादव (वरिष्ठ साहित्यकार), उर्मिलेश (वरिष्ठ मीडिया कर्मी), प्रो. दिनेश कुशवाह (वरिष्ठ कवि, रीवा), तैयब हुसैन (लोकसंस्कृति मर्मज्ञ, पटना), ए.के.पंकज (आदिवासी संस्कृति के जानकार, रांची), लक्ष्मीकांत पाण्डेय (विचारक, कानपुर), शंभु गुप्त (आलोचक, वर्धा), अनिल राय (आलोचक, गोरखपुर), डा. महेन्द्र प्रसाद कुशवाहा (आलोचक, रानीगंज, पं.बंगाल), मदनमोहन (वरिष्ठ कहानीकार, गोरखपुर), हरि भटनागर ( वरिष्ठ कहानीकार, भोपाल), हनीफ मदार ( साहित्यकार, मथुरा), अरविन्द कुमार सिंह (राज्य सभा टीवी), इरफान (राज्य सभा टीवी), सृंजय (कहानीकार, आसनसोल), चरण सिंह पथिक (कहानीकार, राजस्थान), योगेन्द्र चैबे (सुप्रसिद्ध रंगकर्मी, ग्वालियर), रामजी यादव (कहानीकार, वाराणसी), ताहिरा हसन (सामाजिक कर्मी, लखनऊ), शाह आलम (सामाजिक कार्यकर्ता, फैजाबाद), विद्याभूषण रावत (सामाजिक कार्यकर्ता), दीपक सिन्हा (रंगकर्मी, बेगूसराय), शिवकुमार (कहानीकार, आसनसोल), करूणेश किशन (फिल्म निर्देशक, दिल्ली), संदीप मील (कहानीकार, राजस्थान), अखिलेश्वर पाण्डेय (कवि/पत्रकार, जमेशदपुर), मनोज कुमार सिंह (सामाजिक कार्यकर्ता, गोरखपुर), अभिषेक पंडित, ममता पंडित (रंगकर्मी, आजमगढ़) एवं अन्य साहित्यकार/रंगकर्मी ।

बुधवारः 12 अप्रैल : 8.30 रात्रि से

रात्रि 8.30 (30 मिनट)    हिरावल, पटना का गायन । निर्देशन-संतोष झा ।
रात्रि 9.00 (30 मिनट )  पारंपरिक भोजपुरी धोबिया नृत्य, गाजीपुर । निर्देशन-जीवनलाल ।
रात्रि 9.30 (30 मिनट)   चन्दन तिवारी का गायन ।

रात्रि 10.00 (30 मिनट)  राज मोहन म्युजिकल ग्रुप, नीदरलैंड का प्रवासी भोजपुरी ‘बैठक गान’ । संगत-
सोरद्ज (सूरज) सेवलाल (ढोलक) और पवन माहरे (धनताल)।
रात्रि 10.30 (30 मिनट)  दीपांकर दास, पश्चिमी बंगाल का बाउल गायन और नृत्य ।

रात्रि 11.00 (95 मिनट)  नाटक-‘बहुरा गोड़न’, रंगनायक द लेफ्ट थिएटर, बेगुसराय की प्रस्तुति ।

रात्रि 12.35 (30 मिनट)  अवधी लोक समूह, फैजाबाद की फरुवाही । निर्देशन-शीतला प्रसाद वर्मा।

रात्रि 1.05 (15 मिनट)    जारी गीत, लोकरंग की प्रस्तुति ।

रात्रि 1.20    समापन और धन्यवाद ज्ञापन/ग्रुप फोटोग्राफी ।

संपर्कः- 9919306237/9919950835
सप्रेम आमंत्रण/प्रवेश निःशुल्क

 

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