आगामी कार्यक्रम

लोकरंग 2018,   अप्रैल 13-14,   2018

ग्यारहवां  वर्ष :

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लोकरंग 2018 का संभावित कार्यक्रम इस प्रकार है –

स्वाधीनता सेनानी और भोजपुरी के महान गीतकार रमाकांत द्विवेदी ‘रमता’ को समर्पित

2018
(सांस्कृतिक भड़ैंती, फूहड़पन के विरुद्ध, जनसंस्कृति के संवर्द्धन के लिए)
लोकरंग सांस्कृतिक समिति, जोगिया जनूबी पट्टी, फाजिलनगर (कुशीनगर)

संपर्कः- 9919306237/9919950835

स्वाधीनता सेनानी और भोजपुरी के प्रसिद्ध कवि रमाकांत द्विवेदी ‘रमता’ जी का जन्म महुली घाट, बड़हरा प्रखंड, जिला भोजपुर में 30 अक्टूबर 1917 को हुआ था । 24 जनवरी 2008 को वह स्मृतिशेष हुए । रमता जी गोरख पांडेय और विजेन्द्र अनिल की परम्परा के गीतकार रहे और उन्होंने अनेकों यादगार गीतों की रचना की। ‘हमनी देशवा के नया रचवइया हईं जा, हमनी साथी हईं, आपस में भइया हईं जा या ’राजनीति सबके बूझे के बूझावे के परी’ आदि गीत भोजपुरी गीतों के क्रांतिकारी चेतना की थाती हैं। हम ऐसे ही महान जनपक्षधर गीतकार को, उनके जन्मशदी वर्ष में याद करते हुए, ‘लोकरंग 2018’ को उन्हें समर्पित कर रहे हैं।
 

पहली रात, शुक्रवारः 13 अप्रैल
रात्रि   8.30 से 8.45    ‘लोकरंग-2018’ पत्रिका का लोकार्पण-प्रख्यात फिल्म निर्माता/निर्देशक सागर सरहदी, प्रख्यात हिन्दी लेखक प्रेम कुमार मणि, लोकसंस्कृति मर्मज्ञ तैयब हुसैन, पटकथा लेखक ब्रजमोहन द्वारा।
रात्रि  8.45 से 9.00 कार्यक्रम का अनौपचारिक उद्घाटन प्रख्यात फिल्म निर्माता/निर्देशक सागर सरहदी द्वारा ।
रात्रि   9.00 से 9.15  गांव की महिलाओं द्वारा लोकगीत ।
रात्रि   9.15  से 9.30 कठपुतली नाच, राजस्थानी कलाकारों द्वारा।
रात्रि   9.30  से 10.00 मालवा लोकनृत्य/वर्षागीत/फकीरी और निर्गुन गायन। मुख्य गायक-दयाराम सरोलिया, देवास, मध्यप्रदेश।

रात्रि  10.00 से 10.35 राजस्थानी लोक गीत एवं घूमर लोक नृत्य, लोकनृत्य समूह, जयपुर, राजस्थान की प्रस्तुति।
रात्रि  10.35  से 11.10 महिला आल्हा गायन । शीलू राजपूत एवं अन्य कलाकार, रायबरेली ।
रात्रि  11.10  से  11.40 बिहार का जट-जटिन और कमला पूजा नृत्य, मुख्य कलाकार-कुमार उदय सिंह ।
रात्रि  11.40 से 11.55 बांसुरी वादन। कलाकार-राजन गोविन्द राव, फरना रामकोला, रामकोला, कुशीनगर ।
रात्रि 11.55 से 12.05 स्मृति चिह्न वितरण।
रात्रि 12.05 से प्रातः 1 (14 अप्रैल) नाटक-बड़े भाई साहब । शैली-कहानी का रंगमंच। गुड़ी सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्थान, रायगढ़, छत्तीसगढ़। लेखक-मुंशी प्रेमचंद, निर्देशक-योगेन्द्र चैबे, ग्वालियर।

दूसरा दिन, शनिवारः 14 अपै्रल
पूर्वाह्न 11 से अपराह्न 2 बजेविचार गोष्ठीविषय-सामाजिकता के निर्माण में लोक नाट्यों की भूमिका।
सहभागिता-सागर सरहदी (फिल्म निर्माता/निर्देशक), प्रेम कुमार मणि (वरिष्ठ साहित्यकार), तैयब हुसैन (लोकसंस्कृति मर्मज्ञ, पटना), अब्दुल बिसमिल्लाह (साहित्यकार, दिल्ली), ब्रजमोहन (सीरियल और पटकथा लेखक, गीतकार), प्रो. दिनेश कुशवाह (वरिष्ठ कवि, रीवा), जितेन्द्र भारती (सामाजिक कार्यकर्ता, देहरादून), बलभद्र (कवि/आलोचक), मदनमोहन (वरिष्ठ कहानीकार, गोरखपुर), सुरेश कांटक ( कहानीकार), रामजी यादव (कहानीकार, वाराणसी), रामप्रकाश कुशवाहा (आलोचक, बलिया), धीरेन्द नाथ (साहित्यकार, डोईवाला, देहरादून), विद्याभूषण रावत (लेखक और मानवाधिकार कार्यकर्ता), गीता गैरोला (सामाजिक कार्यकर्ती, देहरादून), डा. महेन्द्र प्रसाद कुशवाहा (आलोचक, रानीगंज, पं.बंगाल), प्रकाश उदय (कवि), डाॅ.के.के. श्रीवास्तव, (रंगकर्मी, आसनसोल), योगेन्द्र चैबे (सुप्रसिद्ध रंगकर्मी, ग्वालियर), मनोज कुमार सिंह (सामाजिक कार्यकर्ता, वरिष्ठ पत्रकार, गोरखपुर) एवं अन्य साहित्यकार/रंगकर्मी ।

दूसरी रात, शनिवारः 14 अप्रैल
रात्रि   8.30  से 9.00    संकल्प, बलिया का गायन । निर्देशन-आशीष त्रिवेदी ।
रात्रि   9.00 से 9.30    निर्मला यादव, कटहरी बाग, बिहार बुजुर्ग, कुशीनगर का निर्गुन गायन ।
रात्रि   9.30 से 10.00  गोड़उ नृत्य । मुख्य गायक-नंदलाल राम, चैबे छपरा, बलिया। संग में मशहूर गायिका-चन्दन तिवारी ।
रात्रि   10.00 से 10.30 सूफी कौव्वाली, देवा, बाराबंकी।

रात्रि   10.30 से 11.00 बणजारा-बणजारी और ग्रामीण भवाई नृत्य, लोकनृत्य समूह, जयपुर, राजस्थान की प्रस्तुति। निर्देशन-चन्दनलाल कालबेलिया।
रात्रि   11.00 से 11.20 पखावज नृत्य।
रात्रि   11.20 से 11.30  स्मृति चिह्न वितरण।
रात्रि   11.30 से प्रातः 1.00 (अप्रैल 15)नाटक-नेटुआ । प्रस्तुति-साइक्लोरामा नाट्य समूह, दिल्ली । लेखक-रतन वर्मा। निर्देशन-दिलीप गुप्ता।
प्रातः   1.00 (अप्रैल 15) से 1.10 धन्यवाद ज्ञापन/ग्रुप फोटोग्राफी/समापन ।

संचालनप्रो. दिनेश कुशवाह, हिन्दी विभागाध्यक्ष, रीवा विश्वविद्यालय (म.प्र.) । देश के जाने-माने वरिष्ठ कवि।

संभवना कला मंच, गाजीपुरकविता पोस्टर, भित्ति चित्र, मंच और मंच परिसर की सज्जा। निर्देशन-डाॅ. राजकुमार ।
बहुरूपिया कलाकर, बांदी कुंई, राजस्थान। गांव और मंच परिसर में बहुरूपिया कला का प्रदर्शन। निर्देशन- शमशाद।

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