झारखंडी भाषा साहित्य , संस्कृति अखाड़ा, रांची

झारखंडी भाषा साहित्य,संस्कृति अखड़ा की खडि़या नृत्य दल, ढिड़ैली (छपर टोली), गुमला (झारखंड), ने लोकरंग  २०१५ में  खडि़या पारंपरिक बंदई नृत्य और खडि़या पारंपरिक करम नृत्य प्रस्तुत  किया  और  टीम का नेतृत्व-वंदना टेटे ने किया  .
खडि़या पारंपरिक बंदई नृत्य-‘बंदई’ खडि़या आदिवासी समुदाय का कार्तिक महीने में मनाया जाने वाला त्यौहार है. यह खेती-किसानी से जुड़ा हुआ त्यौहार है और इसमें मुख्यतः मवेशियों के प्रति कृतज्ञता-ज्ञापन होता है. भैंसों की बंदई कार्तिक अमावस्या की प्रथम चंद्रमा को और गाय-बैलों का बंदई कार्तिक पूर्णिमा को परंपरागत तरीके से मनाया जाता है.
खडि़या पारंपरिक करम नृत्य-‘करम’ त्यौहार भी कृषि से संबंधित है और खेतों में धान की फसल अच्छी हो, इस हेतु यह त्यौहार मनाया जाता है. करम के तीन प्रकार हैं- 1. बूढ़ी करम, 2. राज करम और 3. टोला करम. राज करम भादो महीने की ग्यारहवीं चंद्रमा के दिन मनाया जाता है. इसमें विशेषतः अविवाहित युवक-युवतियां भाग लेती हैं.

Comments are closed