प्रस्तुतियाँ (2015 )

रविवार: 12 अप्रैल, 2015 रात्रि: 9.15 बजे से

रात्रि 9.15 बजे ‘लोकरंग 2015’ स्मारिका का लोकार्पण /कार्यक्रम का अनौपचारिक उद्घाटन ।
रात्रि 9.30 गांव की महिलाओं द्वारा रोपनी गीत । गायिका-मतिरानी देवी, ज्ञानती, लालती,
सुभागी, रुकमीणा और सुशीला ।
रात्रि 9.50 बंटी वर्मा (गाजीपुर) के लोकगीत ।
रात्रि 10.20 बाउल गान । मुख्य गायक-बरून दास ‘बाउल’ एवं अजय दास, नयन अंकुर, काशी नाथ
बायन, संजय मंडल और अनंत विश्वास। ग्राम-फुलबेरिया, पो0-शामडी, जिला-बर्द्धमान,
प0बंगाल ।
रात्रि 10.50 निर्गुन गायन । मुख्य कलाकार-रामप्रकाश मिश्र, रजवटिया पश्चिम टोला, कुशीनगर ।
रात्रि 11.10 कबीर और मालवी गायन । मुख्य कलाकार- दयाराम सारोलिया, देवास मध्यप्रदेश ।
रात्रि 12.15 नाटक-सुपनवा का सपना।

सोमवार: 13 अप्रैल, पूर्वाह्न 11 से अपराह्न 2 बजे तक विचार गोष्ठी

विषय-‘लोक संस्कृति का वर्तमान और भविष्य’

सहभागिता- पंकज बिष्ट (वरिष्ठ साहित्यकार/संपादक, समयान्तर, दिल्ली), प्रो. दिनेश कुशवाह (हिन्दी विभागाध्यक्ष, रीवा विश्वविद्यालय, रीवा), तैयब हुसैन (लोकसंस्कृति मर्मज्ञ, पटना), डाॅ लाल रत्नाकर, (सुप्रसिद्ध चित्रकार, गाजियाबाद), हृषिकेश सुलभ (कहानीकार, पटना), जयप्रकाश कर्दम (साहित्यकार, दिल्ली), मदनमोहन (कहानीकार, गोरखपुर), जितेन्द्र भारती,  डाॅ. विजय चैरसिया (बैगा लोकसंस्कृति मर्मज्ञ, डिंडौरी, मध्यप्रदेश),  राम प्रकाश कुशवाहा (एसोसिएट प्रोफेसर, हिन्दी, बनारस ), डाॅ. महेशचन्द्र शांडिल्य (कार्यक्रम अधिकारी, आदिवर्त संग्रहालय, खजुराहो), ताहिरा हसन (उपाध्यक्ष, एपवा, लखनऊ), शिवकुमार (साहित्यकार, बर्द्धमान), नलिन रंजन (साहित्यकार, प्रदेश सचिव, जलेस, लखनऊ),  दयानंद पाण्डेय (साहित्यकार, लखनऊ), मनोज कुमार सिंह (सामाजिक कार्यकर्ता/पत्रकार.), अशोक चैधरी (अध्यक्ष, गोरखपुर पत्रकार संघ), पी.सी. गिरि (साहित्यकार, बलरामपुर) एवं अन्य साहित्यकार/ रंगकर्मी ।

सोमवारः 13 अप्रैल: 9.15 रात्रि से

रात्रि 9.15  पटना इप्टा द्वारा जनगीत ।
रात्रि 9.45 लोरिकायन। मुख्य कलाकार- किशुन यादव, ग्राम- पोखरापुर, टोला रामनगर, गोपालगंज, बिहार ।
रात्रि 10.15 बाकुम । कलाकार-रामकेवल, ग्राम-भरपटिया, तमकुहीराज, कुशीनगर ।
रात्रि 10.30 हुड़का। कलाकार-भोला, विश्वनाथ, छेदी प्रसाद, झेंगड़, अलगू, रामरूप, गजाधर, शारदा, शिवमूरत, बिन्दू प्रसाद ग्राम- दहारी पट्टी, कुशीनगर ।
रात्रि 11.00 झारखंडी भाषा साहित्य, संस्कृति अखड़ा, खडि़या नृत्य दल, ढिड़ैली (छपर टोली), गुमला (झारखंड) की खडि़या पारंपरिक बंदई नृत्य और खडि़या पारंपरिक करम नृत्य प्रस्तुत करेगा । कलाकार-राजेश डुंगडुंग/काबा खडि़या/गांधी खडि़या/गिरजा खडि़या/विक्रांत केरकेट्टा/बुधेश्वर कुल्लूू /बुधवा पाहन/ निर्मला कुल्लू/प्रमिला टेटे/सुनीता कुल्लू/रूबेन खडि़या/फगन खडि़या/संगीता कुल्लू/अणिमा कुल्लू/बसंती कुल्लू/शांति कुल्लू/मीना डुंगडुंग/करमी खडि़या/अणिमा बिलुंग/संपति कुल्लू/कलावती खडि़या/वंदना टेटे । रात्रि 11.45 कौव्वाली । कौव्वाल-असगर अली, कप्तानगंज । रात्रि 12.15 नाटक-गबरघिचोरन के माई। रात्रि 1.45 समापन और धन्यवाद ज्ञापन/ ग्रुप फोटोग्राफी ।

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