रंग नायक (बेगूसराय)

रंगनायक, बेगूसराय-लोकरंग 2014 में इस संस्था द्वारा प्रस्तुत नाटक, चरणदास चोर के लेखक सुप्रसिद्ध नाटककार हबीब तनवीर हैं । पूंजीवादी व्यवस्था और भ्रष्ट तंत्र की पोल खोलता नाटक, एक ऐसे चोर की कहानी है जो अपनी सच्चाई को बचाने के लिए जान से हाथ धो बैठता है । नाटक छत्तीसगढ़ी लोक शैली में लिखा गया है और संस्था ने इसे बिदेशिया व किरतनिया शैली में तैयार किया है, जिसकी भाषा हिन्दी और भोजपुरी है ।
रंगनायक द लेफ्ट थिएटर, बेगूसराय ने 2017 में लोक नाट्य-बहुरा गोड़न प्रस्तुत किया .
इस नाटक में बहुरा गोड़न, मल्लाह जाति की एक साहसी महिला है जो बेगूसराय जनपद के बखड़ी सलौना गांव की रहने वाली है  । यह गांव कमला और बलान नदी के तट पर स्थित है। बहुरा, तंत्र विद्या में निपुण थी। उसकी खूबसूरत पुत्री अमरौती, नृत्य विद्या में पारंगत थी। उधर दरभंगा के भरौड़ का राजा दयाल सिंह, संगीत एवं नृत्य के अलावा तंत्र विद्या में निपुण था। उसका अमरौती से प्यार हो जाता है। बहुरा इसे पसंद नहीं करती। इसलिए बहुरा और दयाल में तंत्र युद्ध होता है। बाद में बहुरा, प्रेम के आगे हार मानते हुए अपनी बेटी का ब्याह, दयाल सिंह से कर देती है। यह प्रस्तुति लोक परंपरा के साथ पितृ सत्ता के खिलाफ स्त्रियों के संघर्ष की गाथा है, साथ ही मिथिलांचल के व्यापारिक उद्भव और विकसित समाज से दर्शन कराता है।

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